संभागायुक्त की कुर्सी का आशीष मिलेगा,पटवारी भी तो इंसान है, विद्यादान छोड़ कर दे रहे थे मदिरा ज्ञान,गजब है रतलाम नगर निगम, पानी मांगा तो एफआईआर मिली,ये शिक्षक कुछ अलग ही है, अग्रवाल हो सकते हैं मेला प्राधिकरण अध्यक्ष, गडकरी सच्चे तो शिवराज झूठे

संभागायुक्त की कुर्सी का आशीष मिलेगा

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। सिंहस्थ मेला अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार होने से महीने में एकाधिक बार बैठकों में जाने वाले इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह जनवरी 26 से स्थायी रूप से संभागायुक्त उज्जैन की हैसियत से सारी तैयारियों के सूत्र अपने हाथ में ले सकते हैं। सिंहस्थ के लिहाज से मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने भरोसे के और अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपते जा रहे हैं। हाल ही में पदस्थ कलेक्टर रोशन कुमार सिंह पहले यहां नगर निगम आयुक्त रह चुके हैं। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह के पास सिंहस्थ मेला अधिकारी का अभी अतिरिक्त प्रभार है। जहां तक कैडर और अनुभव का सवाल है,तो आशीष सिंह 2010 बैच के आईएएस हैं,पिछले सिंहस्थ-2016 में यहां की व्यवस्था का उनको अनुभव भी है। कलेक्टर रोशन सिंह 2015 बैच के हैं,वे भी अनुभवी हैं लेकिन कैडर और अनुभव में सिंह आगे हैं। वही उज्जैन के वर्तमान संभागायुक्त संजय गुप्ता दिसंबर तक रिटायर होने वाले हैं। जिस तरह मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए सिंहस्थ प्रतिष्ठा का कारण बन चुका है,तो वे चाहते हैं कि इसकी बागडोर किसी बेहद भरोसेमंद और रिजल्ट देने वाले अधिकारी के हाथ में हो। चूँकि कमिश्नर एक ऐसा पद है,जिस पर रहते हुए ज़िला प्रशासनए मेला प्रशासन,विकास प्राधिकरण और अन्य सभी विभागों को नियंत्रित किया किया जा सकता है। लिहाज़ा,जनवरी 2026 में कलेक्टर आशीष सिंह का प्रमोशन होते ही,उन्हें इस पद पर बैठाया जा सकता है।

पटवारी भी तो इंसान है

इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह द्वारा राजस्व काम में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए लगातार किए जा रहे,नए काम से पटवारियों की परेशानी बढ़ गई है। प्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष मनोज परिहार ने कलेक्टर को पत्र लिखकर साफ  कहा है कि पटवारी भी इंसान ही है ,उसका भी परिवार है। वह छुट्टी के दिन नहीं आएंगे,केवल आपातकालीन सेवा के लिए ही वह छुट्टी पर आएंगे। पटवारी को अवकाश के दिनों में पहले केवल आपातकालीन सेवा के लिए बुलाया जाता था,लेकिन अब सामान्य कामों के लिए भी पटवारी को कार्य पर लगाया जाता है।

गडकरी सच्चे तो शिवराज झूठे

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अभी हाल ही में बदनावर आकर गए थे। यहां उन्होंने सड़क निर्माण की घोषणा के साथ कहा कि जो सड़कें बनेगी,वो अमेरिका जैसी होंगी। लोग इसलिए हैरत में थे कि यही बात भी तो शिवराज सिंह चौहान मप्र के मुखिया रहते कई बार बोलते रहे थे कि मप्र की सड़कें अमेरिका जैसी हैं। लोगों को आश्चर्य इस बात का था कि शिवराज ने यदि उस वक्त मप्र की सड़कें अमेरिका जैसी होने की बात कही थी,तो गडकरी क्यों कह रहे हैं कि अमेरिका जैसी सड़कें मप्र की होंगी....?

विद्यादान छोड़ कर दे रहे थे मदिरा ज्ञान

कटनी जिले के एक सरकारी स्कूल के एक शिक्षक को बच्चों को शराब पिलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने शिक्षक को निलंबित कर दिया है। कलेक्टर दिलीप कुमार यादव ने जिला शिक्षा अधिकारी ओपी सिंह को शिक्षक के खिलाफ  कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया। उन्होंने बताया कि वीडियो को विभिन्न ब्लॉकों के अधिकारियों को भेजा गया और बाद में शिक्षक की पहचान लाल नवीन प्रताप सिंह के रूप में हुई है।

गडकरी सच्चे तो शिवराज झूठे

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अभी हाल ही में बदनावर आकर गए थे। यहां उन्होंने सड़क निर्माण की घोषणा के साथ कहा कि जो सड़कें बनेगी,वो अमेरिका जैसी होंगी। लोग इसलिए हैरत में थे कि यही बात भी तो शिवराज सिंह चौहान मप्र के मुखिया रहते कई बार बोलते रहे थे कि मप्र की सड़कें अमेरिका जैसी हैं। लोगों को आश्चर्य इस बात का था कि शिवराज ने यदि उस वक्त मप्र की सड़कें अमेरिका जैसी होने की बात कही थी,तो गडकरी क्यों कह रहे हैं कि अमेरिका जैसी सड़कें मप्र की होंगी?

गजब है रतलाम नगर निगम 

रतलाम के अमृत सागर क्षेत्र में पानी की बेहतर और पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए महापौर प्रहलाद पटेल ने जिस स्थान पर 16 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी का भूमिपूजन किया था,वहीं अब नया पेंच आ गया है। जिस जमीन पर यह टंकी बननी थी,वह जमीन तो निजी निकल गई। बताया जा रहा है जमीन को लेकर कोर्ट में कोई केस भी चल रहा है। इस स्थिति में यहां काम शुरू होने से पहले ही,फिलहाल इस पर रोक लग गई है। ठेकेदार ने जमीन को लेकर आए नए घटनाक्रम को लेकर नगर निगम को सूचना भी दे दी है। अब नगर निगम का अमला राजस्व की मदद से नई जगह ढूंढने की कवायद में जुट गया है।

ये शिक्षक कुछ अलग ही है

भिंड जिले में एक अजीब मामला सामने आया है। आलमपुर के एक सरकारी स्कूल के पूर्व प्राचार्य सुरेश माहौर शिक्षा विभाग में फैली गड़बड़ियों से परेशान हैं। इसलिए वे नंगे पैर,गले में चप्पलों की माला डालकर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव से शिकायत करने निकले थे। कार्रवाई होने तक वे अपना प्रदर्शन जारी रखने की बात भी कह रहे हैं। सुरेश माहौर ने पहले भी दो बार अनशन किया था,उन्होंने सभी बड़े अधिकारियों से शिकायत भी की थी। लेकिन उन्हें सिर्फ  आश्वासन मिला,कोई कार्रवाई भी नहीं हुई। इसलिए इस बार वे खुद ही विरोध करने निकल पड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी,वे हार नहीं मानेंगे।

अग्रवाल हो सकते हैं मेला प्राधिकरण अध्यक्ष

उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ से पहले सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया जाना है। इस पद के लिए कौन योग्य होगा? अभी जो नाम चर्चा में हैं उनमें सबसे ऊपर जगदीश अग्रवाल का नाम चल रहा है। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल की सीएम से निकटता भी जगजाहिर है। 2012 के सिंहस्थ में शिवराज सरकार ने यह दायित्व प्रदेश संगठन मंत्री रहे माखन सिंह को सौंपा था।

पानी मांगा तो एफआईआर मिली

खंडवा में पीने के पानी की मांग करने पर 3 महिलाओं समेत 8 लोगों के खिलाफ  एफआईआर दर्ज की गई है,यह मामला चर्चा में है। क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने एफआईआर को गलत बताते हुए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं पीड़ित महिलाओं और कांग्रेस नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे अन्याय बताया है। खंडवा शहर के कई वार्डों में इन दिनों भीषण जल संकट बना हुआ है। जिसका लोगों ने विश्वा कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। यहां पेयजल वितरण कर रही विश्वा कंपनी की पाइप लाइन बार-बार फूट रही है। ऐसे में खंडवा नगर निगम टैंकरों से पानी सप्लाई कर व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है। टैंकरों से जो पानी आ रहा है,वह गंदा है। इसी समस्या को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और चक्का भी जाम किया था।

नीरस बिदाई रोशन हो गई

उज्जैन में शराबबंदी का फरमान सीएम ने जारी किया था और उनके आदेश का सख्ती से पालन कराने का दायित्व जिस अधिकारी पर हो,उसके ही सुरा प्रेम के किस्सों की पुष्टि भोपाल द्वारा जिले के पुलिस कप्तान से किए जाने के बाद से  प्रशासनिक अमला समझ चुका था कि अब साहब ज्यादा दिन के मेहमान नहीं है। जिस तरह नीरस बिदाई हुई है उससे उज्जैन में पदस्थ अधिकारियों को समझ आ गया है कि सीएम के आदेश को रोशन करने में ही समझदारी है।