सीएमओ धामनोद माया मंडलोई की धुआंधार बैटिंग पर लगेगा विराम या नेताओं के समर्थन से करती रहेगी बोलिंग?

लोकायुक्त इंदौर की जांच में धामनोद नगर परिषद में भ्रष्टाचार खुली परते-नवनिर्वाचित अध्यक्ष सीमा विष्णु पाटीदार के कार्यकाल में भी पूर्व अध्यक्ष दिनेश शर्मा का जारी रहा भ्रष्टाचार का खेल-हुई एफआईआर दर्ज

पेटलावाद  सीएमओ और धामनोद सीएमओ पर कब होगी कार्यवाही?

झाबुआ/धार। संजय जैन-सह संपादक।  सूत्रों अनुसार सीएमओ धामनोद माया मंडलोई जहां भी कार्यरत रहती है,वे अपने बचाव में नस्तियों या नोटशीट जो भी हो उस पर टिप अंकित नियमानुसार करती चली आ रही है ताकि उन पर कोई आरोप लगे तो,वे यह कह सके कि मैने नियमानुसार उस पर टिप लिखी थी। उल्लेखनीय है कि मैडम सीएमओ यह भूल जाती है कि  चेक पर सबसे पहले हस्ताक्षर इनके ही होते है । यह कार्य भी उनको नियमानुसार ही स्वीकृतियों के साथ करना होता है। क्या वे चेक पर बगैर नियम देखे हस्ताक्षर करती है। क्या इनको यह याद नहीं रहता कि उन्होंने नस्तियों पर नियमानुसार टिप अंकित की है? इस मान से तो भुगतान विधि समंद है या नहीं,यह देखे बिना ही वे सरपट हस्ताक्षर कर देती है,तब उन्हें यह नियम याद नहीं रहता है  क्या?

पद पर ना रहते हुए भी शासकीय राशि आहरित करा ली

माया मंडलोई सीएमओ जो कि धार जिले के धामनोद में पदस्थ है। इनके कार्यकाल का नगर परिषद में एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है,जिसमें आचार संहिता होने के बाद भी उनके द्वारा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई है। आपको बता दे कि पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय इंदौर द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी माया मंडलोई ने पद पर ना रहते हुए भी पूर्व अध्यक्ष दिनेश शर्मा से फर्जी तरीके से हस्ताक्षर करवा कर 3 लाख23 हजार 775 रुपए की शासकीय राशि आहरित कराई है ।

अक्षम्य कृत्य-पूर्व अध्यक्ष ने हस्ताक्षर किए और राशि का भुगतान भी कर दिया

राज्य निर्वाचन आयोग ने 28 दिसंबर 2022 को नगरी निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी की थी इसके साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। चुनाव उपरांत 11 फरवरी 2023 को सीमा विष्णु पाटीदार धामनोद नगर परिषद की नई अध्यक्ष निर्वाचित हुई व उन्होंने 13 फरवरी 2023 को पदभार संभाला था। गौरतलब है कि इसके बावजूद भी मार्च 2023 तक के अधिकतर बिल.-वाउचरों पर पूर्व अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने हस्ताक्षर किए और राशि का भुगतान कर यह  अक्षम्य कृत्य  भी कर  दिया ।

कैसे की धोखाधड़ी?

नगर परिषद ने संबंधीत बैंक को 22 फरवरी 2023 को ही सूचित कर दिया था कि 50 हजार से अधिक के सभी भुगतान अब सिर्फ  सीएमओ माया मंडलोई और नव निर्वाचित अध्यक्ष सीमा विष्णु पाटीदार के संयुक्त हस्ताक्षर से ही आहरित या भुगतान किये जायेंगे। मजेदार बात तो यह है कि बावजूद इसके ऐसे सात वाउचरों पर भुगतान किया गया,जिन पर पदासीन अध्यक्ष सीमा विष्णु पाटीदार नहीं बल्कि पुराने निवर्तमान अध्यक्ष दिनेश शर्मा के हस्ताक्षर थे। यह तो सीधे तौर से वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के अपराध की श्रेणी में आता है।

क्या-क्या खरीदा गया?

इन फर्जी भुगतान वाउचरों में  विद्युत सामग्री की खरीदी,मुरम डालने का कार्य,जेसीबी किराया और फ्लेक्स बैनर छपाई आदि शामिल है। बिलों की कुल राशि 3 लाख 23 हजार 775 दर्शाई गयीं है। उपरोक्त भुगतान कुल 7 वाउचर क्रमांक 683, 684,701,705,710,712 और 713 के माध्यम से कुल राशि 3 लाख 23 हजार 775 का भुगतान किया गया है। उक्त सूची के अधिकतर वाउचरो का भुगतान नगर परिषद धामनोद के स्टेट बैंक ऑफ़  इंडिया शाखा,एबी रोड-धामनोद के खाता क्रमांक 3862 1419 64 से होना प्रमाणित भी हुआ है।

कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ते कदम

विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन  इंदौर ने जांच में पाया कि तत्काली मुख्य नगर पालिका अधिकारी माया मंडलोई एवं तत्कालीन अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने संगठित तरीके से षडयंत्र पूर्वक यह अक्षम्य कृत्य किया है। इस अक्षम्य कृत्य को भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धाराएं-7/ग/13/1/13/2/12 और भारतीय दंड संहिता की धाराएं 409,120-ठ के अंतर्गत दंडनीय पाए जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

73 दिन पहले भी हुई थी दो अलग-अलग फर्जी भुगतान की एफआईआर दर्ज

विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय इंदौर ने भ्रष्टाचार की शिकायत के संबंध में 5 फरवरी 2025 को दो अलग- अलग एफआईआर दर्ज की थी। इसमें एक रिपोर्ट में नगर परिषद धामनोद की तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी माया मंडलोई और तत्कालीन अध्यक्ष दिनेश शर्मा सहित नारायण पिता सुख्या, निवासी संजय नगर, महेश्वर रोड-धामनोद के खिलाफ  प्रकरण दर्ज कर मामला दर्ज किया गया था। उल्लेखनीय है कि दूसरी बार फिर से तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी माया मंडलोई और मोहम्मद अनीस पिता मोहम्मद यूनुस खत्री, संजय नगर, महेश्वर रोड-धामनोद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 7/ग/13/1-13/ 2-12 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120- ठ के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए मामला जांच में लिया गया था।

एक संगठित साजिश

गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण की परते दर परते जब खुली तो पता चला कि यह कोई किसी एक की साजिश नही थी,यह तो एक संगठित षड्यंत्र था। जिसमें  तत्कालीन सीएमओ माया मंडलोई और तत्कालीन अध्यक्ष दिनेश शर्मा की मिली भगत से नगर परिषद का खजाना बेख़ौफ  लूट गया था। आपको बता दे की नगर परिषद धामनोद में पदस्थ सीएमओ माया मंडलोई का स्थानांतरण नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल ने पीओ डूडा-परियोजना अधिकारी बडवानी के पद पर करके उनको कार्यमुक्तभी कर दिया था और चार्ज बलराम भूरे नगर परिषद सीएमओ धरमपुरी को दे दिया गया था।

कैसे निरस्त हुआ स्थानांतरण ?

मजेदार बात तो यह है कि ऐसे अक्षम्य कृत्य में लिप्त होने में प्रमाणित होने के बाद भी माया मंडलोई का स्थानांतरण आदेश  कैसे निरस्त हो गया. ? माया मंडलोई सीएमओ ने पुनःनगर परिषद धामनोद में कार्यभार संभाल लिया तो कार्यालय में कर्मचारियों सहित विशेष लोगों ने फूल बरसा कर इनका स्वागत भी किया। सूत्रों अनुसार आपको ज्ञात हो वे जहां भी पदस्थ रही वहा पर विवादों में ही घिरी रहती है। इनके कार्यकाल में वे देवास जिले के भौंरासा में लोकायुक्त में ट्रैप भी हुई थी,एक कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा भी था। इनको जैसे ही  ट्रेप की जानकारी मिली तो वे अपने कार्यालय तक भी नहीं गई, ऐसा सूत्र बताते है।

पेटलावाद सीएमओ और धामनोद सीएमओ पर कब होगी कार्यवाही?

अब देखना है कि नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल धामनोद सीएमओ और पेटलावद-झाबुआ सीएमओ आशा भंडारी जिनकी जांच भी पहुच चुकी है,आगे इनके खिलाफ  क्या कार्यवाही करता है? उल्लखनीय है कि सूत्रों की माने तो धामनोद सीएमओ को तो भाजपा के कतिपय नेताओं का समर्थन भी हासिल है इसके चलते ही वे धामनोद छोड़ना ही नहीं चाहती है। प्रदेश में भाजपा का शा