इंदौर/झाबुआ। संजय जैन-स्टेट हेड। सात बार इंदौर नंबर वन रहा है यह कहते हुए इंदौर नगर निगम पोमाते तो नहीं थकते,लेकिन इस शहर को यह पूछने का भी अधिकार तो है कि निगमकर्मियों को ये अधिकार किसने दे दिया कि सड़कों से ठेले वालों को हटाने के लिये उनके ठेले उलट दें। 

महापौर को इस शहर ने इसीलिये दायित्व सौंपा है क्या....?

निगमायुक्त की भी बेबसी है कि निगम गैंग उनकी हंसी उड़ाने पर आमादा रहती है। बुधवार की दोपहर पीली गैंग ने फिर ऐसी ही बहादुरी दिखाई। चंद्रगुप्त सिनेमा तिराहा पर शनी मंदिर के पास खरबूज बेच रहे ठेलेवाले पर निगमकर्मियों ने झपट्टा मारा, वो कुछ समझे तब तक तो ठेला पलट दिया। सड़क पर खरबूज, तराजू और बाट बिखरे पड़े थे और निगमकर्मी अपने वाहन में ठेला लादने में लगे थे। पीली गैंग की इस हिटलरशाही को देख रहे क्षेत्र के लोगों ने विरोध तो किया ही, साथ ही वीडियो भी बनाने लगे। लोगों के विरोध का असर यह हुआ कि एक अन्य फल विक्रेता का ठेला पलटने को आमादा निगमकर्मियों ने खुद उसके ठेले से फल खाली करवाए और बाद में उसका ठेला जब्त किया। 

महापौर की राजनीतिक मजबूरी....

पीली गैंग की यह मनमानी पहली बार नहीं देखी गयी है। हर दो चार महीने में कभी अंडे का ठेला तो कभी सब्जी-फल वालों का ठेला पलटना आम बात हो चली है। यह इस इंदौर शहर का दुर्भाग्य ही है कि सांसद, विधायक और नगर निगम में बहुमत भी भाजपा का है। उल्लेखनीय है कि शहर से लेकर राज्य और केंद्र तक ट्रिपल इंजन की सरकार है,लेकिन निगमकर्मियों के इस आतंक के खिलाफ बोलने की किसी भी जनप्रतिनिधि में हिम्मत नहीं होने का ही परिणाम है कि पीली गैंग के हौंसले सातवे आसमान पर है। महापौर की तो राजनीतिक मजबूरी समझी जा सकती है लेकिन निगमायुक्त भी या तो पीली गैंग के इस आतंकी रवैये से अनभिज्ञ हैं या उनकी शह पर गरीबों की रोजी-रोटी छीनने का यह खेल चल रहा है। 

दिन भर की कमाई को सड़क पर फेंक देने का क्या औचित्य....?

शहर का हर नागरिक इस पक्ष में है कि व्यस्ततम मार्ग अतिक्रमण और ठेले-गुमटी वालों के अतिक्रमण से मुक्त होना ही चाहिए,लेकिन दिन भर की कमाई को सड़क पर फेंक देने का क्या औचित्य....? नगर निगम ठेले वालों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिये ठेले जब्त करनं के साथ ही इतना भारी जुर्माना लगाए कि अगली बार नियमों की अवहेलना करने की कोई हिमाकत ही नहीं कर सके। 

हमने मनमानी की छूट नहीं दी है, कर्मचारियों पर कारवाई करेंगे...

नियमों की अवहेलना करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई के लिये कहा है लेकिन ठेले वालों का सामान फेंकने जैसी मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निगमायुक्त से भी इस संबंध में चर्चा करुंगा और संबंधित निगमकर्मियों पर कारवाई भी करेंगे। 
.......पुष्यमित्र भार्गव-महापौर, इंदौर

निगमकर्मियों द्वारा ठेला पलटने, सड़क पर सामान फेंकने जैसी हरकत पूरी तरह नैतिक बात नही है। इन कर्मचारियो इस तरह की हरकत से तो भाजपा परिषद को नाम बदनाम हो रहा हैं।यदि समझाइश के बाद भी ठेले वाले नहीं मान रहे हैं तो उन्हें तगड़ा आर्थिक दंड वसूलना चाहिए।
....कल्याण देवांग--पूर्व पार्षद, इंदौर